सीकरी से मेरठ तक फैला बंदरों का खौफ — आखिर क्यों नहीं हो रही कार्रवाई?

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बन्दरों का आतंक बढ़ रहा है अब ये बात कहना भी मजाक लगने लगा है क्योंकि इस मामले को सरकार, वन विभाग और प्रशासन महज एक मजाक ही समझ रहे हैं.. बीते दिनों से aadumkhor बन्दरों ने सेंकड़ों लोगों पर हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल किया.. कितने लोग ऐसे थे जिनके हाथ चलने बंद हों गए औऱ वही एक महिला की मौत की खबर भी सामने आयी थी

बन्दरों का मचाया हुआ ये कोहराम अब सिकरी तक ही नहीं रहा है बल्कि meerut और Hapur से भी कयी मामले सामने आए हैं लोगों ने अपने स्तर पर काफी कोशिशें की तहसील में ज्ञापन सौपना प्रदर्शन करना लेकिन फिर भी प्रशासन ने एक नहीं सुनी लोगों को बन्दरों का इतना खौफ है कि अब बच्चों का घर से बाहर आना बंद होगया है बड़े अपने घर से निकलते समय हाथों में डंडे लेकर निकल रहे हैं इतने केस सामने आने के बावजूद भी प्रशासन के जरिये कोई कार्यवाही नहीं हो रहीं तो क्या ये कहना सही होगा कि सरकार को जनता से कोई वास्ता नहीं है? सरकार लोगों को यू ही मरता छोड देना चाहती है? आखिर क्या बन्दरों की इस समस्या का कोई समाधान नहीं हो रहा है?


आपको बता दे कि अभी बीते कुछ ही दिनों पहले supreme court of India ने आवारा जानवरों मुख्या तौर पर आवारा कुत्तों को लेकर एक फैसला सुनाया था जिसमें कहा गया था कि सार्वजनिक जगह से ये जानवर हटाये जाये क्योंकि लोगों को उनसे खतरा हो सकता है तो अखिर क्यु बन्दरों के इस मामले को नजर अंदाज किया जा रहा है? अगर बात कुत्तों की करे तो जब कोई पागल कुत्ता किसी को काठ ले तो उसके लिए कई कानून बने हैं लेकिन यहाँ जब बन्दर वही काम करे तो प्रशासन की चुप्पी क्यूँ अखिर क्यूँ बन्दरों के लिए ऐसा कोई कानून नहीं है? क्या अब लोगों की तकलीफ सरकार के कानों तुक जानी बंद हो चुकी है या प्रशासन बेहरा होने का दिखावा कर रहा है हमने अपने चैनल के जरिये भी आपको इस समस्या से अवगत कराया था और तबसे अबतक ये समस्या यू ही बनी हुई है तो सवाल उठता है कि क्या प्रशासन इस मुद्दे पर कुछ समाधान निकालेगा और अगर समस्या का समाधान होगा तो अखिर कब या फिर अब जनता को खुद अपने हाथों में अपनी ये समस्या लेनी होगी और खुद आगे आकर इसका समाधान निकालना होगा.

लेकिन एक पहलु ये भी है कि अगर लोगों ने अपने हाथ में अपनी समस्या ली और गलती से भी अपनी आत्मरक्षा करते हुए बंदर को किसी तरह की हानि पहुचा दी तो फिर उल्टा बन्दरों को हानि पहुचाने के लिए उन लोगों पर ही केस बन जायेगे मेनका गांधी जैसे activists जो animal rights के लिए अपनी लड़ाई लड़ते है वो उन लोगों के खिलाफ तो खूब प्रदर्शन करने पर आ जायेगे तो क्या आम इंसान यू ही अपनी जिंदगी किन्ही आतंकी बन्दरों के हाथों में सौंपकर मरने के लिए तैयार रहे

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